क्षय रोग ( T.B ) के "आयुर्वेदिक उपचार" | "Ayurvedic Treatment" Of T.B

क्षय रोग ( T.B ) के "आयुर्वेदिक उपचार" | "Ayurvedic Treatment" Of T.B








टी.बी क्या है? 

 क्षय रोग (टीबी) बैक्टीरिया (माइकोबैक्टेरियम तपेदिक) के कारण होता है जो अक्सर फेफड़ों को प्रभावित करता है। क्षय रोगजनक इलाज योग्य और रोकथाम योग्य है।

यह कैसे फैलता है? 

टीबी हवा से व्यक्ति के रूप में व्यक्ति से फैल गया है। जब फेफड़े टीबी खांसी, छींक या थूक वाले लोग, वे टीबी रोगाणुओं को हवा में घुमाते हैं। एक व्यक्ति को इन जीवाणुओं में से कुछ को संक्रमित होने के लिए श्वास लेना पड़ता है।


पहला प्रयोगः घी - मिश्री के साथ बकरी के दूध का सेवन करने से , स्वर्णमालती तथा च्यवनप्राश का सेवन करनेे से क्षय रोग में फायदा होता है।

दूसरा प्रयोगः अडूसे के पत्तों केे 10 से 50 Ml रस में 9 से 10 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो बार रोज पीने से क्षय रोग में फायदा होता है।

तीसरा प्रयोगः क्षय रोग के कारण होती खाँसी में गोखरु तथा असगंध के 1 से 2 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से तथा उपर से दूध पीने से फायदा होता है।

चौथा प्रयोगः 5 ग्राम पिसी शक्कर , 5 ग्राम पिसा हुआ  सिंघवखार तथा 10 ग्राम शुद्ध शहद इन तीनों चीजों को एकत्रित करके दिन में तीन बार रोज 1 महीने तक देने से महा भयंकर क्षयरोग में फायदा होता है।

फेफड़ों का क्षय :
     
         लहसुन के ताजे रस में रूई डुबोकर नाक पर बाँध दें ताकि अदंर जानेवाली श्वास के साथ मिलकर वह रस फेफड़ों तक पहुंचे। लहसुन का रस सूख जाने पर बार - बार रस छींटकर रूई को गीला रखना चाहिए। ऐसा करने से फेफड़ों का क्षय मिटता है।

पथ्य : क्षय रोग में बकरी का दूध , चावल , मूँग की खिचड़ी , परवल आदि का सेवन करें।



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