"आयुर्वेदिक उपचार" वीर्यवृद्धि के - "Ayurvedic Treatment" For Sperm Increasing
वीर्यवृद्धि के लिए :
पहला प्रयोगः सफेद प्याज का 10 से 20 Ml रस , 5 से 10 Ml शहद , अदरक का 5 से 10 Ml रस और 1 से 2 ग्राम घी मिलाकर प्रातःकाल 21 दिन तक सेवन करने से वीर्यवृद्धि होती है।
दूसरा प्रयोगः अश्वगंधा के 2 ग्राम चूर्ण को घी - मिश्री के साथ खाने से तथा उपर से दूध पीने से अथवा कौंचबीज एवं खसखस का समान मात्रा में चूर्ण मिलाकर उसमें से आधा तोला ( 6 ग्राम ) चूर्ण रोज दूध के साथ सुबह - शाम लने से कभी-भी घातु क्षीण नहीं होती एवं विर्यविकार मिटते है।
तीसरा प्रयोगः प्रतिदिन 1 हरड़ का सेवन करने से या 1 पके केले में 6 ग्राम घी डालकर रोज सुबह - शाम खाने से धातुक्षषीणता एवं प्रदर - रोग में फायदा होता है।
चौथा प्रयोगः सुखाये हुए सिंधाड़े एवं मखाने को समान मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बनाकर रखें। उसमें से 1 तोला ( करीब 12 ग्राम ) चूर्ण मिश्री के साथ खाकर उपर से दूध पीने से अथवा 2 से 5 ग्राम गुड के साथ श्याम तुलसी के आधा से 1 ग्राम बीज खाने से योवनसुरक्षा होती है।
धातुस्राव होने पर :
पहला प्रयोगः गुडुच ( गिलोय ) , गोखरू एवं आँवले का आधा से 1 ग्राम चूर्ण अथवा 1 से 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण पानी के साथ रोज 2 बार लेनेे से वीर्यस्राव में फायदा होता है।
दूसरा प्रयोगः 1 से 2 ग्राम तुलसी के बीज रात्री को पानी में भिगोकर सुबह लेने से अथवा बड़ के दूध की कुछ बूँदें 1 बतासे में डालकर रोज सुबह खाकर ऊपर से दूध पीने से 15 से 20 दिन में घातुस्त्राव बंद होकर वीर्य गाढ़ा होता है।
स्वप्नदोष :
पहला प्रयोगः बेल के पत्तों के 10 से 50 Ml रस में 2 से 10 ग्राम शहद डालकर पीने से अथवा 1 से 2 ग्राम हरड़ को उतनी ही मिश्री के साथ खाने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।
दूसरा प्रयोगः ठीक से पके हुए 2 केलो को छीलकर मसल डालें। उसमें हरे आँवलों का रस एवं शुद्ध शहद 1 - 1 तोला मिलाकर प्रातः (सुबह) - सायं ( साम को ) सेवन करने से स्वप्नदोष में फायदा होता है। यह प्रयोग थोड़े दिन ही करें।
तीसरा प्रयोगः 4 से 5 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह - शाम पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है।
चौथा प्रयोगः स्वप्नदोष , विर्यविकार या प्रदररोग में आँवले का चूर्ण और समान मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर रात को भोजन के पश्चात् पानी के साथ लेने से फायदा होता है।
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तीसरा प्रयोगः प्रतिदिन 1 हरड़ का सेवन करने से या 1 पके केले में 6 ग्राम घी डालकर रोज सुबह - शाम खाने से धातुक्षषीणता एवं प्रदर - रोग में फायदा होता है।
चौथा प्रयोगः सुखाये हुए सिंधाड़े एवं मखाने को समान मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बनाकर रखें। उसमें से 1 तोला ( करीब 12 ग्राम ) चूर्ण मिश्री के साथ खाकर उपर से दूध पीने से अथवा 2 से 5 ग्राम गुड के साथ श्याम तुलसी के आधा से 1 ग्राम बीज खाने से योवनसुरक्षा होती है।
धातुस्राव होने पर :
पहला प्रयोगः गुडुच ( गिलोय ) , गोखरू एवं आँवले का आधा से 1 ग्राम चूर्ण अथवा 1 से 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण पानी के साथ रोज 2 बार लेनेे से वीर्यस्राव में फायदा होता है।
दूसरा प्रयोगः 1 से 2 ग्राम तुलसी के बीज रात्री को पानी में भिगोकर सुबह लेने से अथवा बड़ के दूध की कुछ बूँदें 1 बतासे में डालकर रोज सुबह खाकर ऊपर से दूध पीने से 15 से 20 दिन में घातुस्त्राव बंद होकर वीर्य गाढ़ा होता है।
स्वप्नदोष :
पहला प्रयोगः बेल के पत्तों के 10 से 50 Ml रस में 2 से 10 ग्राम शहद डालकर पीने से अथवा 1 से 2 ग्राम हरड़ को उतनी ही मिश्री के साथ खाने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।
दूसरा प्रयोगः ठीक से पके हुए 2 केलो को छीलकर मसल डालें। उसमें हरे आँवलों का रस एवं शुद्ध शहद 1 - 1 तोला मिलाकर प्रातः (सुबह) - सायं ( साम को ) सेवन करने से स्वप्नदोष में फायदा होता है। यह प्रयोग थोड़े दिन ही करें।
तीसरा प्रयोगः 4 से 5 ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह - शाम पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है।
चौथा प्रयोगः स्वप्नदोष , विर्यविकार या प्रदररोग में आँवले का चूर्ण और समान मात्रा में मिश्री का चूर्ण मिलाकर रात को भोजन के पश्चात् पानी के साथ लेने से फायदा होता है।
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